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1. मां के साथ बिताया ” वक़्त ” उन्हें दिया हुआ ” सम्मान ” मां के साथ किया हर ” काम ” ये तीनों ही जिंदगी के वो अहसास हैं जो आपको कहीं पर भी झुकने, किसी भी मोड़ पर रुकने और जीवन की किसी भी परिस्थिति और मुसीबतों में आपको टूटने नहीं देंगी…☝
2. मां के साथ बिताया ” वक़्त ” उन्हें दिया हुआ ” सम्मान ” मां के साथ किया हर ” काम ” ये तीनों ही जिंदगी के वो अहसास हैं जो आपको कहीं पर भी झुकने, किसी भी मोड़ पर रुकने और जीवन की किसी भी परिस्थिति और मुसीबतों में आपको टूटने नहीं देंगी…☝
3. शत शत नमन तुमको है माता ,है नमन बलिदान को, है नमन महिमा को तेरे है नमन इस प्यार को।
4. can’t explain माँ in word’s or in पंक्तियाँ..माँ के लिए तो जितना likho उतना कम है.. love u माँ.. ❤️❤️
5. मां ❤️ तुम पर क्या लिखूं… तुमने तो मुझे लिखा है।🌼
6. माँ के चरणों में जन्नत हे🙏😘
7. जिसके प्यार के एहसास को शब्दों में बयाँ न किया जा सके वो होती है “माँ” ।।
8. यह एक दिलचस्प कहानि है , जिसकी मुख्य किरदार कोई मर्द नहीं बल्कि एक मर्दानी हैं, दरअसल ये कहानि हर उस माँ की है, जो इस धरती पर उस ईश्वर की निशानी हैं।।
9. मां के लिए क्या लिखूं , उसने तो मुझे खुद लिखा है ❤️❤️
10. ऊपर जिसका अंत नही उसे आसमाँ कहते है, जहाँ मे जिसका अंत नही उसे माँ कहते है……😍😍😍
11. जज्बात अलग है पर बात तो एक हैं , उसे मां काहू या भगवान बात तो एक है ।
12. आज फिर माँ ने आखिरी रोटी अपनी थाली से उससे खिला दी … और वो अनजाने में अब भी रब को तलाशता है..!! ✍️ ❤️
13. प्रार्थना करूँ, या इबादत बात तो एक है, उसे ख़ुदा कहूँ, या माँ बात तो एक है।।।
14. मुझे चोट लगती तो मा आंसू बहाती है………… मा ऐसी शक्ति है जो पंक्तिया मे बयान नही होती है…
15. मुझसे ज़्यादा जानती है, मेरे बारे में ! जैसे आइना दिखाता हो तस्वीर मेरी !! कैसे क़रीब आता मेरे साया ग़म का ! मेरी माँ ने ख़ुद लिखी है तक़दीर मेरी !!
16. माँ के ऊपर क्या शेर लिखूं माँ ने मुझे खुद शेर बनाया है
17. माँ सिर्फ तुम मुझे दुनिया से 9 माह ज्यादा जानती हो सिर्फ तुम मुझे सबसे ज्यादा मानती हो माँ सिर्फ तुम ही हो जो मेरा हर दर्द पहचानती हो मैं से लेकर ‘I’ तक का वजूद तुझी से है आई (माँ) ।
18. माँ से जीने का वजूद मिला अब माँ के लिये जीने की वजह बन गया।
19. दिल सा नूर अगर चेहरे पर होता , खुदा कसम , मेरी माँ सा कही और ना कोई कोहिनूर होता।
20.
घर का बोझा अलग वो मेरा बस्ता भी उठाती थी। बचपन मे माँ अक्सर मुझे स्कूल से लेने आती थी
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